yuvraj singh : कभी-कभी क्रिकेट हमें ऐसे पल देता है जो ज़िंदगीभर याद रहते हैं। हाल ही में खत्म हुई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में भारत के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपना पसंदीदा पल चुनते हुए बताया कि मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में चौथा टेस्ट ड्रॉ कराना उनके लिए बेहद खास था।

भारत उस वक्त मुश्किल में था। दूसरी पारी में 0/2 के स्कोर पर और इंग्लैंड से 311 रन पीछे — हार लगभग तय लग रही थी। लेकिन फिर मैदान पर आए शुभमन गिल, रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर, जिन्होंने खेल का रुख बदल दिया। गिल ने शानदार शतक जमाया और फिर जडेजा-सुंदर की जोड़ी ने मिलकर नाबाद 203 रनों की साझेदारी कर इतिहास रच दिया। भारत ने दिन का खेल 425/4 पर खत्म किया और मैच को ड्रॉ कर लिया।
युवराज ने इस लम्हे को याद करते हुए कहा,
“मैंने बहुत समय से ऐसा पल नहीं देखा था। वॉशिंगटन और जडेजा दोनों ने शतक जड़े और टीम को बचा लिया। जडेजा तो लंबे समय से टीम में हैं, लेकिन सुंदर के लिए, बतौर युवा खिलाड़ी इंग्लैंड में यह करना अविश्वसनीय था।”
मैनचेस्टर का ड्रॉ क्यों था इतना अहम?
यह ड्रॉ सिर्फ एक मैच बचाने का मामला नहीं था, बल्कि पूरी सीरीज़ का भविष्य बदल गया। अंततः सीरीज़ 2-2 से बराबर रही, जिसमें केनिंग्टन ओवल के पांचवें टेस्ट में भारत ने 6 रन से रोमांचक जीत दर्ज की। अगर मैनचेस्टर में हार होती, तो सीरीज़ का स्कोर 3-1 हो जाता और भारत के पास बराबरी का मौका नहीं रहता।

इस प्रदर्शन ने आलोचकों को भी चुप करा दिया, जिन्होंने दौरे से पहले ही युवा टीम को खारिज कर दिया था। ओवल में जीत के साथ भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप प्वॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर पहुंच गया और इंग्लैंड चौथे पर खिसक गया। अब शुभमन गिल एंड कंपनी की नजरें 2 अक्टूबर से वेस्ट इंडीज के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज़ पर हैं, जहां और प्वॉइंट्स बटोरने का मौका रहेगा।
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