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cheteshwar pujara का संन्यास: एक युग का अंत, जिसने क्रिकेट को धैर्य और संघर्ष की मिसाल दी 24 august

By: anjali singh

On: Sunday, August 24, 2025 5:04 PM

cheteshwar pujara
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cheteshwar pujara :कभी-कभी ज़िंदगी के कुछ पल हमें चुपचाप भावुक कर जाते हैं। आज भारतीय क्रिकेट के चाहने वालों के लिए ऐसा ही एक दिन है। वो खिलाड़ी, जिसने क्रिकेट की सबसे लंबी फ़ॉर्मेट में समय को अपना सबसे बड़ा दोस्त बनाया, जिसने बल्ले से धैर्य और जज्बे की कहानी लिखी, जिसने जीत को वक्त की डोर से बांधा – चेतेश्वर पुजारा – ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

यह विदाई भी उनके व्यक्तित्व की तरह ही सादगी से भरी रही। न कोई भव्य समारोह, न रोशनी का तामझाम, बस एक चुपचाप लिखा गया विदाई संदेश और उन सभी यादों की गूंज, जिनमें उन्होंने भारतीय क्रिकेट के सुनहरे अध्याय गढ़े।

cheteshwar pujara
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क्रिकेट की किताब में सुनहरे अक्षरों में लिखा नाम

पुजारा ने 103 टेस्ट मैचों में 7,195 रन बनाए, 19 शतक जमाए और एक ऐसे बल्लेबाज़ के रूप में खुद को स्थापित किया, जिसने कभी हार नहीं मानी। उनका करियर औसत 43.60 रहा, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत आंकड़ों से परे थी। उन्होंने वो किया, जो शायद आने वाले समय में कोई दोहरा न सके – भारत को ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहली ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

साल 2018-19 की सीरीज़ आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उस सीरीज़ में पुजारा ने 1,258 गेंदों का सामना किया, 521 रन बनाए और तीन शतक जड़े। वह वह दीवार बने, जिसे ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज गेंदबाज़ कभी तोड़ नहीं पाए। नाथन लायन ने थककर पूछा था, “क्या तुम्हें बैटिंग करते हुए बोरियत नहीं होती?” पुजारा ने सिर्फ़ हल्की-सी मुस्कान दी। यही उनकी पहचान थी—शांति, संयम और समर्पण।

देखे पुजारा के स्टेटस https://www.cricbuzz.com/profiles/1448/cheteshwar-pujara

कोहली के दौर का सच्चा साथी

विराट कोहली के दौर में जब भारतीय टीम ने नई ऊंचाइयां छुईं, वहां हर बार पुजारा का नाम छुपा हुआ हीरो बनकर सामने आया। कोलंबो की मुश्किल पिच हो या रांची की मैराथन पारी, पुजारा ने बार-बार साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ़ रन बनाने का नहीं, बल्कि जंग जीतने का नाम है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 49.38 की औसत से पांच शतक बनाए, जो उन्हें इस पीढ़ी का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ बनाता है।

धैर्य की मिसाल, समर्पण की पराकाष्ठा

पुजारा का जीवन उतना ही प्रेरणादायक है जितनी उनकी बल्लेबाज़ी। बचपन में मां को खोने के बाद पिता ने उन्हें क्रिकेट सिखाया और मां की सीख – विनम्रता और ध्यान – ने उन्हें मानसिक मजबूती दी। यही वजह थी कि मैदान पर वो हमेशा शांत दिखाई देते थे, जैसे हर गेंद से पहले ध्यानमग्न हो जाते हों।

cheteshwar pujara
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बदलते क्रिकेट युग में आखिरी ‘दीवार’

आज जब क्रिकेट में तेज़ रनों और ‘बाज़बॉल’ की बात होती है, पुजारा जैसे धैर्यवान खिलाड़ी का मिलना मुश्किल है। उनका संन्यास केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं है, बल्कि उस कला का अंत है जो गेंद को देखकर उसके साथ जीना सिखाती थी।

पुजारा का नाम सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं रहेगा, बल्कि उन पलों में अमर रहेगा जब उन्होंने टीम को हार से जीत की राह पर खड़ा किया। आने वाले समय में शायद ही कोई ऐसा बल्लेबाज़ हो, जो पुजारा की तरह वक्त को अपनी ताकत बना सके।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और भावनात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारियां पूरी तरह से लेखक की शैली और विश्लेषण पर आधारित हैं।

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Anjali Singh is a dedicated journalist covering lifestyle, health, and human-interest stories with a passion for making news engaging and relatable
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